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हैप्पी बर्थडे....राहुल द्रविड़

भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे अभाग्यशाली क्रिकेटरों की अगर सूची तैयार करने को कहा जाए ,तो मेरी लिस्ट में सब से पहला नाम भारत के 207वें टेस्ट क्रिकेटर राहुल शरद द्रविड़ का होगा।

इंग्लैंड के टूर पर तीन टेस्ट मैचों की श्रुंखला खेल रही भारतीय टीम पहला टेस्ट हार कर ,20 जून 1996 को लॉर्ड्स के मैदान पर उतरी और डेब्यूटेंट राहुल द्रविड़ ने 267 गेंदों पर 6 चौक्कों से सजी 95 रनों की एक आदर्श व आकर्षक टेस्ट पारी खेली।इसी पारी की बदौलत टीम ने पहली पारी की बढ़त हासिल की।
पर ठहरिए,ये भारत के आक्रामक कप्तान सौरव चंडीदास गांगुली का भी पहला टेस्ट था,और उन्होंने इस पहली पारी में 301 गेंदों में शानदार 131 रन बनाए।

तब किसे पता था ये क्रिकेट इतिहास के सबसे मशहूर त्रिमूर्ति का एक साथ पहला टेस्ट था,किसने सोचा था अगले कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट का सारा दारोमदार अपने कंधों पर ले कर चलने वाले महारथी हैं बनेंगे ये।

पहले टेस्ट की 95 रनों की पारी पर सौरव गांगुली के 131 भारी गए।

टेस्ट ड्रा के तौर पर खत्म हुआ,इंग्लैंड श्रृंखला में 1-0 कई बढ़त के साथ
ट्रेंटब्रिज,नॉटिंघम पहुंचा।
टॉस जीत कर तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया।

सलामी बल्लेबाजों नयन मोंगिया और विक्रम राठौर अपेक्षाकृत बहुत कम अनुभवी थे लिहाजा स्कोर बोर्ड जल्द ही 33-2 का नजारा दिखा रहा था।

विक्रम राठौर के आउट होने पर सौरव गांगुली और नयन मोंगिया के विकेट गिरने के बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अब क्रीज पर थे।
एक बहुत ही खराब शुरुआत को अच्छे स्कोर में तब्दील करने की जिम्मेदारी इन्ही दोनो कंधे पर थी।

जिसे इन दोनों ने बखूबी निभाया भी,दोनो ने संभाल कर खेलते हुए न सिर्फ अपना विकेट बचाया ,रन भी बनाये।

पहले घँटे जो स्कोर दो विकेट पर 33 रन था वही पहले दिन का खेल खत्म होने पर 287-2 पर पहुंच चुका था।
डेब्यू में शतक जड़ने वाले सौरव गांगुली लगातार दूसरा शतक बना चुके थे और 136 पर नॉट आउट थे,जबकि मास्टर ब्लास्टर अपने करियर का  10वां टेस्ट शतक बनाते हुए 123 पर नाबाद थे।
तीसरे विकेट की अविजित साझेदारी में अब तक 254 रन जोड़े जा चुके थे।

दूसरे दिन का खेल शुरू हुआ तो हर किसी की नज़र सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर पर थी पर अभी स्कोर में एक ही रन जुड़ा था कि सौरव गांगुली अपने पिछले दिन के स्कोर पर ही एलन मुलाली की गेंद पर नासिर हुसैन को कैच थमा बैठे।

अब संजय मांजरेकर आये उन्होंने यहां एक अर्धशतक(53)  बनाया और तेंदुलकर के साथ 89 रन जोड़े, 377 पर सचिन तेंदुलकर 177 रन बना कर आउट हुए 360 गेंदों तक चली ये पारी 26 खूबसूरत चौकों से सजी हुई थी।

कप्तान अजहर सस्ते पे निपट गए अब संजय मांजरेकर का साथ निभाने आये राहुल द्रविड़ जो अपने पहले टेस्ट की पहली पारी में सिर्फ 5 रन से अपना शतक बनाने से चूक गए थे ।

मांजरेकर का विकेट 446 पर गिरा,और एक के बाद एक तीन विकेट सिर्फ 7 रन पर गिर गए स्कोर बोर्ड 7 विकेट पर 453 था।
पारी का अंत करीब नज़र आ रहा था पर राहुल द्रविड़ अभी क्रीज पर थे और उन्होंने वेंकटेश प्रसाद के साथ नवें विकेट के लीए तेज तर्रार 60 रन जोड़ दिये।
भारतिय पारी 521 पर खत्म हुई,द्रविड़ 149 गेंदों में 84 रन बनाये ,आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज थे।

यहां भी सारी चर्चा सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली ले गए ,द्रविड़ को वो तारीफ मिली ही नही।

1999 विश्व कप में श्रीलंका के ख़िलाफ़ टांटन में 129 गेंदों में 17 चौक्कों व  1 छक्के के साथ शानदार 145 रन बनाये, ये किसी भी लिहाज से विश्व कप में खेली गई एक श्रेष्ठ पारी थी।
पर यहां सौरव गांगुली ने 158 गेंदों में 17 चौक्कों व 7 छक्कों के साथ रिकॉर्ड तोड़ 183 रन बना दिये,ये किसी भी भारतीय बल्लेबाज की उस समय की सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय पारी थी ।

यहां भी सारी सुर्खी  गांगुली बटोर गए।

8 नवंबर 1999,हैदराबाद का लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम।

सामने थे न्यूजीलैंड से आये मेहमान।

राजकोट में खेला गया 5 मैचों की श्रृंखला का पहला मैच मेहमानों ने जीत कर सनसनी मचा दी थी

दूसरे मैच में टॉस जीत कर भारतीय कप्तान सचिन तेंदुलकर ने टॉस जितकर पहले बल्लेबाजी का फ़ैसला किया।
50 ओवरों में भारत ने 2 विकेट पर 376 रन बनाये,इस द्रविड़ के नाम 153 गेंदों पर शानदार 153 थे,इस पारी में उन्होंने 15 चौक्के और 2 छक्के लगाए लेकिन वाहवाहीयों का मेला 150 गेंदों पर 20 चौक्कों व 3 छक्कों के साथ नाबाद 186 रन बनाने वाले सचिन तेंदुलकर लूट गए।

सचिन की ये पारी 2010 तक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय का पहला दोहरा शतक बनने तक किसी भी भारतिय बल्लेबाज की  सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय पारी थी,उल्लेखनीय है कि सचिन ने ग्वालियर में अपने ही रिकॉर्ड को और बेहतर बनाया ।

हैदराबाद में सचिन तेंदुलकर के साथ दूसरे विकेट के लिए 331 रन जोड़े तो
टांटन में गांगुली के साथ 318 रन।

एकदिवसीय क्रिकेट में 300 रनों की तब तक कि यही दो साझेदारियां बनी थी,और दोनो में राहुल द्रविड़ शामिल थे।

2001 के कोलकाता के मशहूर फॉलोऑन टेस्ट में 180,लक्ष्मण के 281 के एवरेस्ट के निचे दब गए।

2002 के हैडिंगले टेस्ट में बनाये 148  सचिन के 193 में दब गए, यहां गांगुली ने भी शतक बनाया था और पहला एवं एक मात्र मौका जब त्रिमूर्ति ने एक साथ एक ही पारी में शतक बनाये।

ऑस्ट्रेलिया दौरे में एडिलेड टेस्ट दोहरा शतक बना कर जिताया, लेकिन उस दौरे में कप्तानी की वजह से गांगुली टॉप पर थे,उनकी कप्तानी का योगदान भुलाया भी नही जा सकता।

2004 के पाकिस्तान दौरे पर रावलपिंडी के तीसरे टेस्ट में शानदार 270 रन बनाए,पर मुल्तान के पहले  टेस्ट में गांगुली की जगह कप्तानी कर रहे द्रविड़ ने उस समय पारी समाप्त घोषित कर दी जब सचिन तेंदुलकर 194 पर खेल  रहे थे,यहां भी क्रिकेट प्रेमियों के कोप का भाजन द्रविड़ को बनना पड़ा।

ये वही टेस्ट है जिसमे वीरेंद्र सहवाग ने तिहरा शतक बनाया था।

2005 में जवाबी दौरे पर आई पाकिस्तानी टीम ने मोहाली में हरा हुआ टेस्ट ड्रॉ करा लिया लेकिन कोलकाता में खेले गए दूसरे टेस्ट को राहुल द्रविड़ की दोनो परियों में लगाई सेंचुरी की बदौलत भारत ने 195 रनों की बड़ी जीत हासिल की।
पे चर्चा यहां भी सचिन तेंदुलकर के हिस्से आई,सचिन , गावस्कर के बाद टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले दूसरे भारतिय बने।

इस टेस्ट के स्कोर कार्ड की एक खासियत यह था कि भारत और सचिन दोनो ही ने दोनो परियों में एक बराबर स्कोर बनाया था
भारत का स्कोर 407 एवं 407-9 था, सचिन ने दोनो पारियों में 52 का स्कोर दर्ज किया था।

बंगलुरू का अगला टेस्ट इंजमाम और यूनिस खान की बदौलत पाकिस्तान ने 167 रन से जीतकर सीरीज बराबर कर लिया।

6 एकदिवसीय मैच थे इस श्रृंखला में,कोच्चि का पहला एकदिवसीय राहुल द्रविड़ और सहवाग के शतकों तथा सचिन तेंदुलकर के 5 विकेटों के मदद से जीत लिया, दूसरा मैच विशाखापत्तनम में था,इसी मैच से दुनियाँ  पहली बार  महेंद्र सिंह धोनी को देखा और उनके बल्ले के रौद्र रूप को भी भारत श्रृंखला में 2-0 से आगे चल रहा था पर हमारी टीम ने आश्चर्यजनक रूप से अगले चारों मैच  हार कर श्रृंखला पाकिस्तान की झोली में डाल दी।

इस श्रृंखला में मैदान के बाहर भी बहुत कुछ घटा था,जॉन राइट की ये कोच के तौर पर आखिरी श्रृंखला थी।
कप्तान गांगुली पर धीमी ओवर गति की वजह से प्रतिबंध लगा,नए कप्तान द्रविड़ बने और नए कोच ऑस्ट्रेलियन ग्रेग चैपल।
उनके प्रयोगों ने टीम का बंटाधार तो किया ही गाँगुली के करिअर पर उन्होंने एक तरह से  पूर्ण विराम ही लगा दिया।
और भी कई क्रिकेटरों के साथ ऐसा ही हुआ और बदनामी आई द्रविड़ के हिस्से,कप्तान जो ठहरे।
पर गांगुली ने वापसी की शानदार वापसी।

"2007 के विश्व कप की त्रासदी को कौन भुला सकता है?"

बंगलदेशी व श्रीलंका से हार कर  हमारी टीम पहले ही दौर से  बाहर हो गई,खूब बवाल काटा गया और फिर उसी वर्ष एक नई टीम बनाई गई धोनी जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर के एक सीधे सादे कप्तान के साथ.….इसके बाद कि कहानी तो हर क्रिकेट प्रेमी को पता है कि क्या हुआ।

1970 के दशक के 72 व 73 के सालों में महज 9 महीनों के अंतराल में जन्मे त्रिमूर्तियों में  गांगुली सबसे पहले रिटायर हुए 2008 में।
113 टेस्ट  में 16 शतकों और अर्धशतकों के साथ 7212 रन 42.18 की औसत से  एवं  311 एकदिवसीय में  22 शतकों ,72 पचासों के तथा 40.73 की औसत से 11363 रनों के रिकॉर्ड के साथ।

द्रविड़ का करियर 2012 तक चला और इस दौरान द्रविड़ ने कुल  164 टेस्ट खेले ,भारत के दूसरे सबसे ज्यादा।

13288 रन बनाए,यहां भी दूसरे सबसे ज्यादा।पहले सचिन(15921रन)

36 शतक बनाये,दूसरे सबसे ज्यादा ,(सचिन 51शतक)
63 पचासे लगाए,दूसरे सबसे ज्यादा(सचिन68)
1655 चौक्के लगाए,यहां भी दूसरे सबसे ज्यादा(सचिन 2058)

सौरव गांगुली सही मायने में एकदिवसीय के बल्लेबाज थे,पर राहुल द्रविड़ टेस्ट के और इसका सबसे बड़ा सबूत है टेस्ट क्रिकेट में राहुल द्रविड़ के एक रिकॉर्ड जिसमे वो आज भी नंबर 1 पर काबिज हैं और वो रिकॉर्ड है टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा गेंद खेलने का रिकॉर्ड।
द्रविड़ ने टेस्ट में सबसे अधिक 31 हजार 258 गेंदे खेली है और अगर इसके साथ ही एकदिनी क्रिकेट में उनके द्वारा खेली गई 15284 गेंदों को जोड़ दिया जाए तो उनका रिकॉर्ड और भी भारी भरकम हो जाता है।

एकदिवसीय से रिटायर हुए  344 मैच में 10889 रन के रिकॉर्ड के साथ इस रिकॉर्ड पर धोनी युवराज औए सहवाग तक नही पहुंचे, पर फिर भी वे द वाल कहलाए।
सही मायने में टेस्ट क्रिकेट का बल्लेबाज जो पूरे दिन खूंटा गाड़ बल्लेबाजी कर सकता था।

उनके इस शानदार रिकॉर्ड पर अगर उनकी फील्डिंग कैच को जोड़  दिया जाए तो ये रिकॉर्ड उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे महान क्रिकेटर साबित कर देता है।
जी हाँ द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में 210 कैच भी लपका है ,जो कि विश्व रिकॉर्ड है।
एकदिवसीय क्रिकेट में कैचों की संख्या 124 रही।

वनडे में  12 शतक बनाये,और 83 पचासे भी....फिर भी वे एक टेस्ट क्रिकेटर थे,एक शुद्ध टेस्ट बल्लेबाज।

आज इसी राहुल शरद द्रविड़ का जन्मदिन है,उम्र का अर्धशतक लगाया इन्होंने।
बेहद ही सौम्य व शांत दिखने वाले द्रविड़ को ढेर सारी शुभकामनाएं।

द वॉल.... उम्र का शतक भी लगायें बस यही मनोकामना है।


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8 Comments

आपके क्रिकेट knowledge को सलाम

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बहुत ही सुंदर और उम्दा आलेख,,,, क्या कहने जी,, इतनी बारीकी से आपने mr. Wall के कॅरिअर को शब्द रूप दिया है,,, its outstanding beyond the thoughts

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Mahendra Bhatt

13-Jan-2023 10:10 AM

शानदार

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